ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट : पिछले 35 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, कमाल का रिकार्ड

इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा टेस्ट मैच कमाल का रहा। अगर अपने मैच देखा होगा तो आपको समझ आ रहा होगा, और अगर नही देख पाए तो कोई बात नही हम है ना साथ। साल 1985 के बाद इस मैदान पर पहली बार हुआ है।
मैनचेस्टर के मशहूर ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान में शुरू हुआ यह टेस्ट भी बारिश से प्रभावित है। बारिश के चलते मैच डेढ़ घंटे की देरी से शुरू हुआ। विंडीज़ के कप्तान जेसन होल्डर ने टॉस जीतकर पहले बोलिंग का फैसला किया। होल्डर के दिमाग मे पिछले मैच का अनुभव और टॉस जीतकर निर्णय लेने का मौका दोनों ही था, तो होल्डर का चूकना एक अनुभवहीन कप्तान को दर्शाता, लेकिन होल्डर अपने निर्णय से साबित कर दिया कि अनुभव की कमी तो नही ही है।
इधर इंग्लिश कप्तान अपने टीम में काफी बदलाव के साथ आये थे। इंग्लैंड टीम की बात करे तो टीम में 10वें नम्बर तक बल्लेबाजो के साथ उतरे थे। और उतरते भी क्यों न पिछले मैच से सबक जो मिल गया था। हालांकि उनकी इस लंबी बैटिंग लाइनअप का विपक्षी कप्तान पर कोई ऐसा असर नही दिखा। उन्होंने टॉस जीतते ही कहा- हम फिर चेज करेंगे।
कमाल का चेज
इंग्लैंड के लिए रोरी बर्न्स और डॉम सिबली ने ओपनिंग का जिम्मा संभाला। सिबली और बर्न्स की जोड़ी ने शुरुआती ओवर आराम से निकाल दिए। दोनों ने ही क्रीज पर ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने को प्राथमिकता दी। उन्हें ग़लतियों से बचता देख विंडीज़ कैप्टन जेसन होल्डर थोड़ा घबराए जरूर थे और उन्होंने पहले आठ ओवर्स में ही उनने चार बोलर्स यूज कर लिए। लेकिन विकेट तो भैया मिल ही नहीं रहे थे। पहले 13 ओवर निकल गए और लंच टाइम तक ऐसा ही माहौल बना था।
बर्न्स के साथ बाकी प्लेयर्स भी वापस लौट आए और अंपायर्स ने वहीं लंच घोषित कर दिया। ये विकेट बेहद खास था। विंडीज़ की टीम बेहतर हालात में लंच करने जा रही थी। लेकिन ये विकेट एक और लहजे में खास था। साल 1985 के बाद पहली बार किसी स्पिनर ने ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट में पहला विकेट लिया था। पिछली बार यह कारनामा जॉन एम्बुरे ने किया था। एम्बुरे ने 1985 की एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के केपलर वेसेल्स को आउट किया था।

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